What is chhath Puja: छठ पूजा क्या है । आइये जानते है
छठ पर्व के कुछ विशेष हिस्से ।
छठ पर्व, छइठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। कहा जाता है यह पर्व मैथिल,मगध और भोजपुरी लोगो का सबसे बड़ा पर्व है ये उनकी संस्कृति है। छठ पर्व बिहार मे बड़े धुम धाम से मनाया जाता है। ये एक मात्र ही बिहार या पूरे भारत का ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है और ये बिहार कि संस्कृति बन चुका हैं। यहा पर्व बिहार कि वैदिक आर्य संस्कृति कि एक छोटी सी झलक दिखाता हैं। ये पर्व मुख्यः रुप से ॠषियो द्वारा लिखी गई ऋग्वेद मे सूर्य पूजन, उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार बिहार मे यहा पर्व मनाया जाता हैं।
People Celebrating Chhath Festival
छठ पूजा
अन्य नाम
छइठ, छठ व्रत, छठ, छठी मइया की पूजा, रनबे माय पूजा, छठ पर्व, डाला छठ, सूर्य षष्ठी[1]
अनुयायी - मैथिल, मगध, बंगाली, भोजपुरी भारतीय प्रवासी और नेपाली ।
प्रकार
हिंदू त्योहार
उद्देश्य
सर्वकामना पूर्ति
अनुष्ठान
सूर्योपासना, निर्जला व्रत
तिथि
काली पूजा के छठे दिन
समान पर्व
बिहार मे हिन्दुओं द्वारा मनाये जाने वाले इस पर्व को इस्लाम सहित अन्य धर्मावलम्बी भी मनाते देखे जाते हैं। धीरे-धीरे यह त्योहार प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ विश्वभर में प्रचलित हो गया है। छठ पूजा सूर्य, प्रकृति,जल, वायु और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित है ताकि उन्हें पृथ्वी पर जीवन की देवतायों को बहाल करने के लिए धन्यवाद, छठी मैया, जिसे मिथिला में रनबे माय भी कहा जाता है ।
भोजपुरी में सबिता माई और बंगाली में रनबे ठाकुर बुलाया जाता है। पार्वती का छठा रूप भगवान सूर्य की बहन छठी मैया को त्योहार की देवी के रूप में पूजा जाता है। यह चंद्र के छठे दिन काली पूजा के छह दिन बाद छठ मनाया जाता है। मिथिला में छठ के दौरान मैथिल महिलाएं, मिथिला की शुद्ध पारंपरिक संस्कृति को दर्शाने के लिए बिना सिलाई के शुद्ध सूती धोती पहनती हैं।
त्यौहार के अनुष्ठान कठोर हैं और चार दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं। इनमें पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी (वृत्ता) से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना, और प्रसाद (प्रार्थना प्रसाद) और अर्घ्य देना शामिल है। परवातिन नामक मुख्य उपासक (संस्कृत पार्व से, जिसका मतलब 'अवसर' या 'त्यौहार') आमतौर पर महिलाएं होती हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में पुरुष इस उत्सव का भी पालन करते हैं क्योंकि छठ लिंग-विशिष्ट त्यौहार नहीं है। छठ महापर्व के व्रत को स्त्री - पुरुष - बुढ़े - जवान सभी लोग करते हैं। कुछ भक्त नदी के किनारों के लिए सिर के रूप में एक प्रोस्टेशन मार्च भी करते हैं।
पर्यावरणविदों का दावा है कि छठ सबसे पर्यावरण-अनुकूल हिंदू त्यौहार है। यह त्यौहार नेपाली और भारतीय लोगों द्वारा अपने डायस्पोरा के साथ मनाया जाता है।
छठ पूजा सामग्री (Chhath Puja Samagri)
बांस की लकड़ी के सूप, कपूर, जोतबत्ती, अगरबत्ती, धूपबत्ती, दक्षिणा, पूजा थाली, गिलास, माचिस, दूध, जल, चावल, चंदन, दीपक, घी, सिंदूर, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, अनाज, सफेद फूल, नारियल, हल्दी, सुथनी, व्रत कथा की किताब और फलों में मीठा नींबू, शरीफा, केला, खजूर, नाशपाती, पकवानों में ठेकुआ, मालपुआ, मिठाई, सूजी का हलवा, पूड़ी और लड्डू आदि।
छठ पूजा विधि (Chhath Puja Vidhi)
षष्ठी के दिन प्रात:काल स्नानादि के बाद संकल्प लिया जाता है। संकल्प लेते समय इस मंत्र का उच्चारण करें- 'ऊं अद्य अमुकगोत्रोअमुकनामाहं मम सर्व पापनक्षयपूर्वकशरीरारोग्यार्थ श्री सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।'
फिर पूरा दिन निराहार और निर्जल रहकर नदी या तालाब पर जाकर स्नान किया जाता है और डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।
सूर्य देव को अर्घ्य देने की विधि:
बांस की तीन बड़ी टोकरी या पीतल के तीन खाली सूप, थाली, दूध और गिलास ले लें। फिर इनमें चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नारियल, हल्दी, गन्ना, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी रखें।
इसमें नाशपाती, बड़ा नींबू, कैराव, शहद, पान, साबुत, सुपारी, कपूर, चंदन, और मिठाई भी रखें।
प्रसाद के रूप में ठेकुआ, मालपुआ, सूजी का हलवा, खीर, पूरी, चावल से बने लड्डू रखें।
इन सामग्रियों को टोकरी में रख लें। सूर्य को अर्घ्य देते समय ये सारा प्रसाद सूप में रखें और सूप के अंदर ही दीपक भी जला लें। इसके बाद नदी में उतर कर सूर्य देवता को अर्घ्य दें।
फिर सूप को दोनों हाथों में लेकर इस मन्त्र 'ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥' का उच्चारण करते हुए तीन बार अस्त होते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
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