वेरोजगारी पर भाषण :TOP 3 SPEECH ON UNEMPLOYED IN HINDI
बेरोजगारी पर भाषण: TOP 3 Speech on Unemployment in Hindi
भाषण:
हम सभी जानते हैं कि भारत एक राष्ट्र के रूप में बेरोजगारी की समस्या से निपट रहा है और हमारी सरकार अपने देश के लोगों को रोजगार देने के लिए कुछ प्रभावी उपाय लागू करने की कोशिश कर रही है। देश के युवा नौकरी के अवसरों की कमी की वजह से परेशान है। चूंकि यह हम सभी के लिए यह एक उचित मुद्दा है इसलिए जनता को समय समय पर इससे अवगत कराने के लिए हर किसी को इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से स्कूल, कॉलेजों आदि में संबोधित करना पड़ता है।
भाषण – 1
आदरणीय प्रबंधक महोदय और प्रिय सहकर्मियों!
चूंकि मंदी का खतरा हमारे सिर के ऊपर मंडरा रहा है इसलिए हमारे लिए इसके बारे में बात करना और भी जरूरी हो गया है। हम सभी जानते हैं कि काम की कमी और हमारे संगठन की घटती वित्तीय स्थिति के कारण हमारे सह-कर्मचारी हटाए जा रहे हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसे अत्यंत धैर्य और सरलता के साथ संभाला जाना चाहिए।
हमारे साथ ऐसा कभी भी हो सकता जब एक दिन कार्यालय में काम करते समय हमारे प्रबंधक महोदय हमें अचानक कहें "क्षमा करें, लेकिन यह आपका आज कार्यालय में अंतिम दिन है"। अब आप सभी ने यह विचार करना शुरू कर दिया होगा कि आप क्या करेंगे, आप पैसे कैसे कमाएंगे और किस तरह अपने परिवार को चलाएंगे? तो चलिए हम इस स्थिति का निपुणता और चतुराई से सामना करते हैं। इससे पहले हम वार्तालाप या चर्चा शुरू करें कृप्या मुझे बेरोजगारी पर एक संक्षिप्त भाषण देने की अनुमति दें ताकि आप वास्तविकता जान सकें और इसके बाद जनता की स्थिति के साथ अपनी परिस्थितियों का मूल्यांकन कर सकें। मुझ पर विश्वास करिए यह आपको इस गंभीर स्थिति का बहादुरी से सामना करने के लिए बहुत प्रोत्साहन देगा।
मुख्य रूप से बेरोजगारी के तीन रूप होते हैं - श्रमिक वर्ग जो अशिक्षित हैं, शिक्षित लोग बिना किसी तकनीकी ज्ञान के और अंत में तकनीकी लोग जैसे इंजीनियर हैं। आइए हम उनके बारे में एक-एक करके पता करें।
मजदूर वर्ग के साथ स्थिति ऐसी है कि उन्हें रोज़गार के अवसरों की तलाश करनी पड़ती है क्योंकि वे दैनिक आधार पर पैसा कमाते हैं इसलिए वे किसी खास जगह पर काम करके नियमित रूप से रोजगार पाने में सक्षम होते हैं। इस अनिश्चित स्थिति में कभी-कभी उन्हें रोजगार मिल जाता है और कभी नहीं मिलता लेकिन बेरोज़गारी की हालत में भी वे जीवनयापन करने की कोशिश करते हैं भले ही उनकी रोटी, कपडा और मकान की बुनियादी आवश्यकताएं पूरी ना हो पाएं। शहर के मजदूरों की स्थिति भी काफी हद तक ग्रामीण मज़दूरों के समान है क्योंकि उन्हें समय समय पर किसी घर,खेत में काम मिल जाता है जो उन्हें जीवनयापन करने में मदद करता है।
जैसा आप जानते हैं कि साक्षर लोगों की आबादी दिन-ब-दिन बढ़ रही है सरकार उन्हें कार्यस्थलों पर समायोजित करने में असमर्थ हो रही है। हमारे शिक्षित युवा पहले ही उनको दिए जाने वाले असंगत वेतन से असंतुष्ट है तथा बेरोजगारी का खतरा उन्हें और भी निराश करता है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें बहुत कम पैसों में गुज़ारा करना पड़ रहा है। चूंकि उनके पास कोई व्यावहारिक अनुभव या तकनीकी विशेषज्ञता नहीं होता इसलिए वे केवल क्लर्क स्तर की नौकरियों की तलाश में रहते हैं जो साक्षर लोगों की बढ़ती संख्या को समायोजित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
जिनके पास तकनीकी योग्यता होती है उन्हें और भी निराशा का सामना करना पड़ता है क्योंकि उन्हें अपनी शैक्षणिक योग्यता के बराबर अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती। चूंकि तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है इसलिए भी वे बेरोजगारी के जाल में फंस गए हैं। यह बात अच्छी है कि अधिक से अधिक लोग शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और उच्च शिक्षा के लिए भी जा रहे हैं लेकिन दुख की बात है कि सरकार उन्हें अच्छे रोजगार के अवसर प्रदान करने में नाकाम रही है। इसलिए हमारे युवाओं में बढ़ता क्रोध और निराशा इन दिनों स्पष्ट हो गया है।
लेकिन हमें अपनी निराशा बढ़ाने के बजाए इस स्थिति से निपटने के बारे में सोचना चाहिए, स्व-रोजगार के अवसर पैदा करने और उस दिशा में अपनी ऊर्जा को गति देने से सकारात्मक नतीज़े हासिल हो सकते हैं। इस तरह बेरोजगारी की गंभीर समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मुझे बस इतना ही कहना था।
धन्यवाद।
भाषण – 2
प्रिय कर्मचारियों!
मेरे लिए यह वाकई एक दुर्लभ अवसर है जहाँ मुझे अपने सभी कर्मचारियों के साथ एक छत के नीचे बातचीत करने का अवसर मिला है। आज यहाँ ऐसा कुछ खास नहीं है कि आप सब इक्कठे हो परन्तु कंपनी के निदेशक के रूप में मुझे एहसास हुआ कि मेरे और कर्मचारियों के बीच समय समय पर संवाद होते रहने चाहिए। दूसरा यदि आप में से कोई किसी चिंतन मुद्दे पर बातचीत करना चाहता है तो कृप्या किसी तरह की घबराहट मन में ना पालें। प्रबंधन समिति निश्चित रूप से इसे हल करने का प्रयास करेगा या संगठन में आवश्यक बदलाव लाएगा।
बढ़ती मंदी की वजह से मैं हर किसी से अनुरोध करता हूं कि काम में एक-दूसरे का साथ दें और हमारी कंपनी की भलाई के लिए सर्वसम्मति से काम कार्य करें। वास्तव में हमें खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए कि हमारे पास नौकरी है और अच्छी विकास संभावनाएं हैं। अच्छी शैक्षिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन लोगों को देखिए जिनके पास काम नहीं हैं या बेरोजगार हैं।
क्या आप जानते हैं कि जिन लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है उनकी संख्या हमारे देश में दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं? विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा मुख्य रूप से आर्थिक मंदी और व्यावसायिक गतिविधियों में सुस्त विस्तार के कारण है जिससे रोजगार उत्पन्न होने के अवसर ना के बराबर हैं।
आदर्श रूप से सरकार को कौशल आधारित प्रशिक्षण गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए अपने विकास उपायों में तेजी लानी होगी ताकि काम की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को कम किया जा सके और आवश्यक योग्यता दी जा सके। यह बेरोजगारी के दीर्घकालिक मुद्दे को हल करने में भी मदद कर सकता है।
यद्यपि ऐसे भी लोग हैं जो खुद बेरोजगार रहना पसंद करते हैं और काम करने को तैयार नहीं है। ऐसे लोगों को बेरोजगार नहीं कहा जा सकता। बेरोजगारी वह होती है जब कोई व्यक्ति काम करना चाहता है लेकिन एक योग्य नौकरी पाने में सक्षम नहीं होता। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारा देश बेरोजगारी के इस गंभीर मुद्दे से जूझ रहा है। दुर्भाग्य से कई इंजीनियर, डॉक्टर, स्नातक या स्नातकोत्तर पद या तो बेरोजगार हैं या अर्द्ध बेरोजगार हैं। बढ़ती बेरोजगारी के कारण राष्ट्र केवल अपने मानव संसाधन को बर्बाद कर रहा है या उसके लाभों का पूरी तरह से उपयोग करने में सक्षम नहीं है।
भारत में बेरोजगारी की दर 2011 से बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है। उस समय यह 3.5 प्रतिशत थी। धीरे-धीरे वर्ष 2012 में यह 3.6% तक बढ़ गई और वर्ष 2013 में यह आंकड़ा 3.7% तक पहुँच गया। तब से बेरोज़गारी की प्रतिशत में किसी भी तरह की गिरावट नहीं देखी गई है। वास्तव में यह भी देखा गया है कि शिक्षा के हर चरण में विशेष रूप से उच्च स्तर पर महिला बेरोजगारी की दर हमेशा पुरुष बेरोजगारी दर से ज्यादा है।
हमारी सरकार को सबसे पहले जो सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाना चाहिए वह है सख्त आबादी नियंत्रण उपायों को लागू करना और लोगों को छोटे परिवार रखने की सलाह देना। इसके बाद भारतीय शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार के लिए कुछ सरल उपाय किए जाने चाहिए। हमारी शिक्षा प्रणाली को कौशल विकसित करने या सैद्धांतिक ज्ञान को सीमित करने के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
इसके बाद छोटे पैमाने पर कुटीर उद्योगों को स्थापित करने की रोजगार की नई संभावनाएं बनानी चाहिए। जब लोग स्वयंरोजगार होंगे तो वे नौकरियों की तलाश नहीं करेंगे बल्कि अपने व्यवसाय में खुद दूसरों को रोज़गार देंगे।
अब मैं बेरोजगारी के इस मुद्दे पर अपने कर्मचारियों की राय आमंत्रित करता हूं और आप सभी इससे निपटने के लिए कुछ सुझाव भी दे सकते हैं।
धन्यवाद।
भाषण – 3
माननीय प्रिंसिपल, माननीय शिक्षकगण और मेरे प्रिय दोस्तों! आप सभी को मेरी ओर से नमस्कार।
इससे पहले कि मैं अपना भाषण शुरू करूँ मैं सभी वरिष्ठ छात्रों से एक सवाल पूछना चाहता हूं कि आप में से कितने जानते हैं कि आप अपने भविष्य में क्या करेंगे? शायद आप में से कोई नहीं जानता! आज मैं यहां आप सबके सामने बेरोजगारी पर एक भाषण देने के लिए मंच पर मौजूद हूं जो सीधे-सीधे मेरे प्रश्न और हमारे भविष्य से संबंधित है क्योंकि यह सबसे बुरी समस्या है जिसका हम सभी को अपनी शिक्षा पूरी होने के बाद सामना करना पड़ सकता हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत 1.32 अरब जनसंख्या का एक विशाल देश है और इसी वजह से यह हमारी सरकार के लिए देश में सभी नौकरी चाहने वालों को रोजगार मुहैया कराने के लिए भी एक मुश्किल काम बन गया है। भारत में लगभग 356 मिलियन युवा आबादी है और संभवत: उन सभी को पैसा कमाने की इच्छा है लेकिन सरकार उन्हें नौकरी प्रदान करे यह कोई आसान काम नहीं है।
इस समस्या के उदय के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहला हमारी शिक्षा प्रणाली उपयुक्त नहीं है। हमारी शिक्षा नौकरी उन्मुख होनी चाहिए लेकिन दुर्भाग्यवश यह पुस्तक के ज्ञान अर्जित करने के लिए तय की गई है। विद्यालय में छात्र अपना पूरा समय किताबें पढ़ने और लिखने में ही बिता देते हैं। उन्हें व्यावहारिक ज्ञान या नौकरी उन्मुख ज्ञान की आवश्यकता है। दूसरा कारण यह है कि हमारे देश की आबादी बड़ी है। यह छोटे परिवार के मूल्यों और लाभों के बारे में लोगों के बीच ज्ञान की कमी के कारण है। शिक्षा और ज्ञान की कमी के कारण दुनिया भर में हमारे देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है जो देश में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार की कमी पैदा करता है।
कुछ योजनाएं और कार्यक्रम हैं जो देश में बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए हमारी भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए हैं। सबसे पहले 2005 में सरकार ने एक साल में एक बेरोजगार व्यक्ति के लिए 100 दिन की रोज़गार की गारंटी देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम शुरू किया था। 200 जिले में इसे लागू किया गया है और इसका विस्तार 600 जिलों तक किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत एक व्यक्ति को प्रति दिन 150 रुपये का भुगतान किया जाता है। भारत की श्रम और रोजगार मंत्रालय ने भी एक और योजना शुरू की जिसे राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल, एक वेब पोर्टल, (www.ncs.gov.in) कहा जाता है। इस पोर्टल की मदद से जिस व्यक्ति को नौकरी की ज़रूरत है वह नौकरी के अद्यतन और रिक्तियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। इस पोर्टल में सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध निजी रिक्तियों और संविदागत नौकरियां उपलब्ध हैं।
सरकार ने एक और सुविधा प्रदान की है। यह एक साप्ताहिक समाचार पत्र है जिसका नाम रोजगार समाचार है जो हर शनिवार की शाम प्राप्त किया जा सकता है। इसमें भारत में उपलब्ध सरकारी नौकरियों और रिक्तियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। इसमें सरकारी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रिया के बारे में सूचनाएं भी शामिल हैं। इन योजनाओं के अलावा व्यवसाय के माध्यम से स्वयं-रोजगार का भी एक विकल्प है। यदि कोई व्यक्ति एक कंपनी शुरू करता है तो वह कई बेरोजगार लोगों के लिए रोजगार प्रदान कर सकता है और यह इस समस्या का भी एक अच्छा समाधान है।
इसी के साथ मैं अपना भाषण समाप्त करना चाहता हूं और मुझे आशा है कि मेरा भाषण आपके भविष्य के लिए उपयोगी होगा।
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