The love : प्रेम क्या है इसे कैसे निभाए ।
प्रेम असल में एक शाश्वत ऊर्जा है तथा इसे ही सारे संबंधों की श्रंखला जुड़ी हुई है प्रेम प्रेमी या प्रेमिका के बीच होने वाला संबंध ही नहीं बल्कि सारी संबंधों की जड़ है पर इससे बड़ा कोई ईश्वर नहीं क्योंकि यही हमें आपस में एक दूसरे से जोड़ के रखता है ।
बहुत से मामलों में हम किसी से प्यार होने का दावा करने लगते हैं मगर हमें सच में नहीं पता होता कि यह प्यार ही है या कुछ और हम अक्सर किसी की सुंदरता रूप रंग ढंग उसका पहनावा उसकी चाल ढाल उसकी सभ्यता उसके बोलने के अंदाज को उसके अदाओं से इत्यादि हम प्रभावित हो जाते हैं और हमारा मस्तिष्क उसके अनुकूल होने की इच्छा करने लगता है इसे हम प्रेम समझ लेते हैं ।मगर यह प्यार नहीं है जिसे हम मोह के सकते हैं इसीलिए बहुत से मनुष्य इस माह के चलते प्यार का नाम दे देते हैं और आगे चलकर उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है प्रेम में हम इन सब चीजों को नहीं देखते बल्कि देखते हुए भी उनसे प्रभावित होते हुए भी उनको पाने की इच्छा ना रखना उनके पास कुछ भी ना हो या होते हुए भी अपनी इच्छाओं को बांधकर बस एक ऊर्जा को स्वतंत्र करना जिसको हम प्रेम कह सकते हैं ऊर्जा आपको शक्ति देती है आपको समझ देती है आपको बुद्धि देती है
बहुत से मामलों में हमने देखा है कि अगर एक इंसान किसी से प्रेम करता है तब उसको पाने के लिए सारी हदें पार कर देता है भले ही दूसरे इंसान के दिल में उसके प्रति कोई भी फीलिंग भावनाएं ना हो बस दूसरे शख्स के ना चाहते हुए भी उसको जबरदस्ती उसको मनाने की उसके साथ आने की प्रयत्न करता है । मगर वह भूल जाता है कि वह अपनी मुंह के बस में दूसरे इंसान को पाना चाहता है मगर यह प्यार नहीं होता ।
प्रेम तो वह होता है जिसने अपने प्रेमी के प्रति निष्ठा हो दूसरे शख्स को कोई जबरन ना की जाए वह चाहे तो साथ आ जाए नहीं तो जिसके साथ भी खुश है उसको रहने दे यही प्यार है उसकी खुशी में आपकी खुशी होनी चाहिए उसको खुश करना ही आपकी जिम्मेदारी बन जाती है बो न होते हुए भी आपके दिल में होनी चाहिए आपको उसके जिस्म से मतलब नहीं उसकी रूह से प्यार होना चाहिए
प्यार निभाने की चीज होती है पाने की नहीं ।🙏🏻

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